Monday, 13 April 2009

चलेगा पता कि पब्लिक स्कूलों पर किसका कंट्रोल

देहरादून। राज्य सूचना आयोग में आए एक मामले के बाद अब जल्द पता चल सकेगा कि प्रदेश के पब्लिक स्कूलों पर राज्य सरकार का नियंत्रण है या नहीं। आयोग ने आदेश जारी कर माध्यमिक शिक्षा विभाग को इस पर स्थिति साफ करने को कहा है। सूचनाधिकार के मामले में पब्लिक स्कूल बार-बार तर्क पेश करते हैं कि उन्हें सरकार से कोई वित्ताीय मदद नहीं मिलती। ऐसे में वे सूचना कानून के दायरे से बाहर हैं। आयोग में आए ऐसे ही एक मामले में तो रुद्रपुर के जेसीज पब्लिक स्कूल ने तर्क दिया है कि वह राज्य सरकार के नियंत्रण में नहीं है। स्कूल ने राज्य सूचना आयोग में अपील दायर कर पूछा है कि वह सूचनाधिकार के तहत लोक प्राधिकारी है या नहीं? स्कूल का कहना है वह न तो राज्य सरकार का स्कूल है और न उसे राज्य से कोई वित्ताीय सहायता मिलती है। ऐसे में उसे राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित कैसे माना जा सकता है। इस मामले में आयोग ने सचिव एवं निदेशक विद्यालयी शिक्षा को भी प्रतिवादी बनाते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग से तीन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने पूछा है कि सचिव माध्यमिक शिक्षा ने किस केंद्रीय अधिनियम, नियम या कोड के तहत 26 जून, 2007 को निदेशक विद्यालयी शिक्षा को निर्देश जारी किए कि वे आईसीएसई और सीबीएसई से संबद्धता के संबंध में पब्लिक स्कूलों को अनापत्तिप्रमाणपत्र निर्गत करें? पत्र में जो शर्त रखी गई, उसे शासकीय नियंत्रण कहा जा सकता है या नहीं? आयोग ने माध्यमिक शिक्षा विभाग को अनापत्तिप्रमाणपत्र का प्रारूप उससे जुड़े निर्देशों व अन्य जुड़े दस्तावेज भी पेश करने को कहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग से यह भी पूछा गया कि एनओसी को लेकर जो निर्देश जारी किए गए हैं, उनमें क्या अन्य शर्तो के साथ सूचना का अधिकार अधिनियम के पालन की शर्त को जोड़ा जा सकता है या नहीं? आयोग ने यह भी साफ करने को कहा है कि ऐसा करने के लिए शिक्षा विभाग अधिकृत है या नहीं। आयोग ने इसी तरह के एक अन्य मामले में आई शिकायत को भी इसी मामले में संबद्ध कर दिया है।

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