Wednesday, 29 April 2009

बादशाही थौल परिसर को विवि के दर्जे की तैयारी!

देहरादून। गढ़वाल मंडल में पौने दो सौ से ज्यादा स्ववित्तपोषित शिक्षण संस्थाओं को संबद्धता और सात सौ से ज्यादा अस्थायी शिक्षकों व कर्मियों का दबाव सरकार व राजनीतिक दलों पर भारी है। समाधान के तौर पर विवि परिसर बादशाही थौल को नए विवि का दर्जा मिल सकता है। केंद्रीय विवि के हाथों झटका मिलने के अंदेशे के मद्देनजर राज्य सरकार इस विकल्प को आजमाने की तैयारी में है। मौजूदा अध्यादेश के मुताबिक केंद्रीय विवि का कार्य क्षेत्र सात जिलों में होगा या पौने दो सौ से ज्यादा स्ववित्तपोषित शिक्षण संस्थान संबद्ध रहेंगे या नहीं, यह तस्वीर डेढ़ माह के भीतर साफ हो जाएगी। फिलवक्त केंद्रीय विवि के समक्ष उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के साथ राज्य की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती भी है। यह तकरीबन तय माना जा रहा है कि केंद्रीय दर्जे के बाद गढ़वाल विवि का मौजूदा स्वरूप बदलेगा। जिस अध्यादेश से केंद्रीय विवि बना है, उसकी अवधि छह महीने में पूरी होनी है। इस दौरान विवि अधिनियम को अस्तित्व में आना होगा। लिहाजा, आगामी जून माह के पहले पखवाड़े तक नीति तय कर ली जाएगी। इस बाबत विवि की कार्य परिषद की मई माह में प्रस्तावित बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। कार्य परिषद के निर्णयों पर केंद्र के रवैये की छाप साफतौर पर नजर आएगी। विवि सूत्रों के मुताबिक उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और इस संबंध में केंद्र सरकार के मानकों के मुताबिक फैसला होने की स्थिति में केंद्रीय विवि का कार्य क्षेत्र गढ़वाल मंडल के सात जिलों से तो सिमटेगा ही, बड़ी तादाद में स्ववित्तपोषित शिक्षण संस्थानों को भी संबद्धता से हाथ धोना पड़ेगा। संस्थानों को नए सत्र में प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं करने की विवि प्रशासन की चेतावनी को इसी तरह देखा जा रहा है। शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक स्ववित्तपोषित शिक्षण संस्थानों को संबद्धता के मामले के समाधान के लिए दून विवि और उत्तराखंड तकनीकी विवि के विकल्पों पर विचार किया गया। सेंटर आफ एक्सीलेंस को लेकर दून विवि की प्रतिबद्धता बरकरार रखने की वजह से इस विकल्प पर सरकार ने कदम पीछे खींच लिए हैं। तकनीकी विवि के साथ तकनीकी शिक्षा से जुड़े निजी संस्थानों की संबद्धता में तो परेशानी पेश नहीं आने वाली, लेकिन उच्च शिक्षा व अन्य रोजगारपरक कोर्स की संबद्धता के लिए विवि के एक्ट में संशोधन की दरकार है। सूत्रों के मुताबिक सरकार की नजरें अब तीसरे विकल्प के तौर पर बादशाही थौल परिसर पर टिकी हैं। यह माना जा रहा है कि केंद्रीय एचएनबी गढ़वाल विवि की ईसी की बैठक में उक्त तीसरे परिसर को विवि झटक सकता है। इस हालात में उस परिसर को राज्य सरकार अपने पाले में लेकर विवि का दर्जा देने पर विचार कर रही है। इससे गढ़वाल विवि में फिलवक्त सात सौ से ज्यादा अस्थायी शिक्षकों व कर्मचारियों के समायोजन को लेकर दिक्कतें दूर होंगी। केंद्रीय विवि में उक्त शिक्षकों व कर्मचारियों के खपने की संभावना नगण्य ही है।

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