Saturday, 18 April 2009

गुलजार रहने वाला टिहरी रहा बेरौनक

इस बार देहरादून में हो रही नामांकन की प्रक्रिया नई टिहरी। स्वतंत्र भारत की संसद में पहले नंबर की संसदीय सीट टिहरी में इस बार बहुत कुछ बदला-बदला सा है। अब तक हुए तमाम लोस चुनावों के नामांकन प्रक्रिया का गवाह रहे टिहरी के जिला मु2यालय में इस बार सन्नाटा पसरा रहा।१९५२ में लोकसभा के पहले आम चुनाव में टिहरी के जिला मु2यालय रहे नरेंद्रनगर में नामांकन की प्रक्रिया संपन्न हुई थी। उसके बाद १९५७, ६२, ६७, ७१, ७७, ८०, ८४ में भी नरेंद्रनगर नामांकन प्रक्रिया का गवाह बना। १९८९ में जिला मु2यालय के नई टिहरी शि3ट होने के बाद २००४ तक हुए चुनाव तक नई टिहरी में ही नामांकन प्रक्रिया अपनाई गई। अब पहली बार टिहरी संसदीय क्षेत्र के लिए नामांकन प्रक्रिया देहरादून में संपन्न हो रही है। इससे भले ही सरकारी अमले ने संतोष की सांस ली हो, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह क्षण बेहद निराशाजनक रहा है। अधिव1ता जेपी पांडेय का कहना है कि अब तो बस टिहरी नाम के लिए संसदीय सीट है, वरना नामांकन से लेकर प्रमाण पत्र तक देहरादून से ही जारी होना है। १९५२ से लेकर २००४ के उपचुनावों तक वोट डाल चुके हरिनंद सेमवाल का कहना है कि नामांकन के दौरान टिहरी के जिला मु2यालय पर मेले सा माहौल रहता था। भीड़ के आने से दुकानदार और वाहन स्वामियों को भी लाभ होता था, लेकिन अब देहरादून में नामांकन होने से ऐसा लगता है, जैसे हमारा अधिकार लुट गया हो।

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