Thursday, 23 April 2009

मेरठ में दिखी उत्तराखंडी संस्कृति की झलक

गढ़वाली लोकगीत व नृत्य ने समां बांधा

मेरठ, ऐतिहासिक नौचंदी मेले में दिन-प्रतिदिन दर्शकों की भीड़ बढऩे लगी है। मंडप में गढ़वाली लोकगीत और नृत्य ने समां बांधा रूपकुंड सांस्कृतिक कला मंच के कलाकारों ने 'गढ़वाली लोकगीत' कार्यक्रम में उत्तराखंडी संस्कृति की झालक पेश की। कार्यक्रम का उद्घाटन एडीश्नल कमिश्नर वाणिज्य कर कृष्णकांत वैदिक ने किया। उनके साथ एडीश्नल कमिश्नर ओपी रतूड़ी भी मौजूद रहे। सबसे पहले महावीर, मनोज, सुरेन्द्र कमांडो, मोहन पंवार, अनीता, रेखा और मुन्नी ने 'ऋषि नृत्य' स्वागत गान पेश किया। इसके बाद नंदराजजात की झाांकी पेश की गयी। सुरेन्द्र कमांडों ने नुक्कड़ों पर होने चर्चाओं पर आधारित हास्य नोटिका पेश की तो दर्शक लोटपोट हो गये। मनोज प्रभाकर, रेवा आदि ने 'धनिया को बीज......' लोकगीत पर नृत्य पेश कर समां बांधा तो मोहन पंवार ने पशु-पक्षियों की आवाज से दर्शकों का आश्चर्य चकित कर दिया। गोपाल राम एंड मोहन पार्टी द्वारा गोलू देवता, भैरव और गणदेव आदि पर आधारित कार्यक्रम भी दर्शकों को पसंद आया। मनोज एंड पार्टी ने गढ़वाली लोकनृत्य पेश किया। पंचनाम देवताओं का नाच भी दर्शकों को पसंद आया।

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