Monday, 23 March 2009

खाल और धार करेंगे बेड़ा पार

चुनाव के उतार-चढ़ाव का भौतिक परीक्षण पौड़ी सीट में अपने ही ढंग से होगा। मैदान में सरपट दौड़ने का सुख गिनती के मौकों पर ही मिलेगा, जबकि अधिकतर समय पहाड़ों की विकट परिस्थितियों से ही जूझना पड़ेगा। अंतिम गांव नीति-माणा से लेकर पंच केदार व पंच प्रयाग के दर्शन करने होंगे। पौड़ी-पौड़ी चढ़ता जा, मतदाता का नाम जपता जा की तर्ज पर कभी पहाड़ की चोटियों(धार) पर चढ़ना पड़ेगा तो घाटियों (गाड़) तक उतरने में भी फुर्ती दिखानी होगी। पौड़ी संसदीय सीट खाल और धार का ऐसा मेल है, जो प्रत्याशियों को पसीना निकालता रहा है। यहां गुमखाल, परसुंडाखाल, नौगांवखाल जैसे दर्जनों खाल हैं। राज्य की यह ऐसी अकेली सीट है, जो पांच जिलों में फैली है और उस पर भी तुर्रा यह कि नब्बे प्रतिशत से अधिक भूभाग पहाड़ी है। तिब्बत से लगी सैकड़ों किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा है तो उत्तर प्रदेश के मैदानों से सटा इलाका भी। इस विस्तृत भू-भाग में फैले हैं छोटे-छोटे गांव, कस्बे और शहर। जितने रंग पौड़ी के भूगोल में हैं शायद उतने ही इसके मिजाज में भी शामिल हैं। सुदूर उत्तर में हिमालय की गोद में भोटिया जनजाति का आधार है। मध्य में राठ और रामनगर क्षेत्र में कुमाऊं की खुशबू। ऐसे में चुनावी ज्ञानेंद्री इतनी संवेदनशील होनी चाहिए कि सारा ज्ञान चुनावी कंट्रोल रूम में एकत्र हो सके। क्योंकि इस सीट पर ज्ञान-ध्यान से ही नैया पार लग पाएगी। पहाड़ की खेती और वोटों की प्रकृति बिलकुल एक जैसी है। किसानों के पास बिखरी जोतें हैं और चकबंदी की उसमें कोई गुंजाइश नजर नहीं आती। ऐसे ही वोट भी इकाई व दहाई के अंक में इस तरह बिखरे हैं कि उनकी ताकत का अंदाज ही नहीं लग पाता। शहर-कस्बों के शोर पर इस वोट की खामोशी भारी पड़ती रही है। यदि जनसंख्या घनत्व के हिसाब से देखें तो यह चमोली में 48, पौड़ी में 129, रुद्रप्रयाग में 120, देवप्रयाग व नरेंद्रनगर में 117 व रामनगर में करीब 177 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। इसके संकेत स्पष्ट हैं कि पहाड़ों में एक-एक वोट के लिए कई किलोमीटर की पद यात्रा करनी होगी। पौड़ी सीट पर साक्षरता का गणित भी रोचक है। चमोली में साक्षरता का प्रतिशत 75.4, रुद्रप्रयाग में 73.6, पौड़ी में 77.5, नरेंद्रनगर व देवप्रयाग में 62.4 तथा रामनगर में करीब 67 है। पौड़ी में सबसे अधिक साक्षर पुरुष 90.9 तथा महिला 65.7 प्रतिशत हैं। इस जनपद की तुलना में अन्य चार जनपदों में साक्षरता का प्रतिशत कम है। देवप्रयाग क्षेत्र में महिलाओं का साक्षरता प्रतिशत पचास से भी कम है। इस सीट पर महिलाओं की औसत साक्षरता 60 प्रतिशत से अधिक तथा पुरुषों की 88 प्रतिशत से ज्यादा है। यह साक्षरता दर परिपक्व जनादेश देने में अहम भूमिका निभाएगी। पौड़ी सीट के बारे में एक तथ्य यह भी है कि यहां राजनीतिक जागरूकता इतनी है कि लोगों को गांवके राजनीतिक समीकरण अमेरिका की नीतियों से हल करने की आदत है। खेत-खलिहान, चौपाल और पंचायत में चुनावी जोड़-घटाव लोगों की दिनचर्या का हिस्सा रहा है। मनीआर्डर संस्कृति के चलते गांवों में महिलाओं पर काफी कुछ निर्भर रहता है। सेना में सेवा देने वालों की संख्या इस सीट पर ठीकठाक है। करीब 17 प्रतिशत से अधिक सैनिक व पूर्व सैनिक मतदाता समय-समय पर नेताओं को अपने वजूद का अहसास कराते रहे हैं। ऐसे में इस सीट का चुनावी खेल विशिष्टता व रोचकता से भरपूर हैं।

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