Saturday, 14 March 2009

फिलहाल नाइट लैंडिंग दो माह दूर

देहरादून, : जौलीग्रांट एयरपोर्ट के सामने खड़ी सबसे बड़ी बाधा के दूर होने में अभी दो माह का समय और लग सकता है। हालांकि, यह हैरान करने वाला ही है कि इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) की मशीनों को मंगाए हुए दो महीने से ज्यादा वक्त हो चुका है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसी लगभग सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। लेकिन, नाइट लैंडिंग सिस्टम नहीं होने से एयरपोर्ट का रंग थोड़ा फीका पड़ जाता है। इसके चलते आए दिन ही उड़ानें निरस्त करनी पड़ती हैं। इससे विमान कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ता है। दून से विमान सेवाएं शुरू करने में कंपनियां इसीलिए हिचक भी दिखाती रही हैं। खासतौर पर मानसून के समय तो फ्लाइट्स कैंसिल होना आम बात हो जाती है। इन्हीं वजहों से जौलीग्रांट एयरपोर्ट में भी आईएलएस लगाने की पहल की गई। योजना तो बीते नवंबर में ही उपकरण स्थापित करने की थी, लेकिन किसी न किसी कारण से देरी होती गई। हद तो तब हो गई जब दो महीने पहले आईएलएस के उपकरण भी आ गए। इन्हें जर्मनी से मंगाया गया। दरअसल आईएलएस उपकरण स्थापित करने के लिए कुछ निर्माण कार्य कराने की जरूरत थी। फिलहाल यही कार्य कराया जा रहा है। एयरपोर्ट प्रशासन से जुड़े अधिकारियों की मानें तो आईएलएस स्थापित करने में अभी दो महीने का समय और लग सकता है।

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