Saturday, 14 March 2009

स्कूलों को कंप्यूटर थमाए नहीं दिए गए शिक्षक

देहरादून, : सूबे के सैकड़ों माध्यमिक स्कूलों को सरकार ने कंप्यूटर तो दिए पर कंप्यूटर विषय शुरू नहीं किया। लेक्चरर पद सृजन का प्रस्ताव रद्दी की टोकरी के हवाले करने के बाद अब कंप्यूटर शिक्षकों के 120 पद सृजन की तैयारी है। राज्य में काफी तादाद में स्कूलों में कंप्यूटर महज शोपीस साबित हो रहे हैं। प्रशिक्षित शिक्षक सीमित संख्या में ही कंप्यूटर से पढ़ाई करा रहे हैं। शिक्षक नहीं होने से बतौर विषय इसकी तैयारी में भी दिक्कतें पेश आ रही हैं। सरकारी माध्यमिक स्कूलों में अभी तक कंप्यूटर अनिवार्य विषय के तौर पर लागू नहीं है। बारहवीं कक्षा में यह वैकल्पिक विषय है। राज्य सीबीएसई पैटर्न लागू कर चुका है। सीबीएसई के स्कूलों में कंप्यूटर विषय पाठ्यक्रम का जरूरी अंग है। इस वजह से राज्य के स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्तियां ठप हैं। यह हालात तब हैं कि बीते वर्ष सरकार ने कंप्यूटर साइंस लेक्चरर की नियुक्ति पर सहमति जता दी थी। इसके लिए एमसीए शैक्षिक योग्यता रखी गई थी। बाद में सरकार ने अपने प्रस्ताव को ही रद्दी की टोकरी के हवाले कर दिया। सरकार ने विधानसभा में भी यह स्वीकार किया है कि छात्रों के लिए स्कूलों में कंप्यूटर मुहैया कराए गए हैं। इसके बावजूद कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति स्कूलों को अपने स्तर पर करने को कहा गया है। पद सृजित नहीं होने से स्कूलों में इन शिक्षकों की नियुक्ति में पेच फंसा है। तकरीबन 1183 इंटर कालेजों में कंप्यूटर शिक्षक नहीं हैं। इनमें 965 सरकारी व 218 सरकारी सहायता प्राप्त अशासकीय स्कूल हैं। निर्वाचित जन प्रतिनिधि, दलों के नेता ही नहीं, कंप्यूटर डिग्रीधारक बेरोजगारों की ओर से भी कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति की मांग लंबे अरसे से की जा रही है। उधर, सूत्रों का कहना है कि उत्तराखंड बोर्ड का विधिवत गठन होने के बाद कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति में अड़चनें जल्द दूर होंगी। बोर्ड अपने एजेंडे के तहत इस पर विचार करेगा। शिक्षा मंत्री मदन कौशिक के मुताबिक 120 कंप्यूटर शिक्षकों के पद सृजित करने की प्रक्रिया जारी है। कंप्यूटर विषय को इंटर के पाठ्यक्रम में ऐच्छिक विषय के रूप में शामिल किया गया है। इसे पाठ्यक्रम का अंग बनाने के बारे में मंथन किया जाएगा।

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